थाकल-हारल सुरुज लगै छथि, चानो कनिक उदास जकाँ
thakal haral suruj lagai chhathi, chano kanik udaas jakan
आनन्द मोहन झा
Anand Mohan Jha
थाकल-हारल सुरुज लगै छथि, चानो कनिक उदास जकाँ
thakal haral suruj lagai chhathi, chano kanik udaas jakan
Anand Mohan Jha
आनन्द मोहन झा
और अधिकआनन्द मोहन झा
थाकल-हारल सुरुज लगै छथि, चानो कनिक उदास जकाँ
थड़-थड़ काँपि रहल दीपक लौ कोनो गरीबक आस जकाँ।
मोजर बूढ़-पुरानक एतबे करथु दलानक रखबारी
काटि रहल छथि जीवन देखू बिनु वेतन अवकास जकाँ।
मंजिल धरि पहुँचेलौं जकरा लूटि लेलक ओ बीच डगर
अन-मन कहबी सन हालति अछि मडुआ रोपि उपास जकाँ।
बाल्मीकि-तुलसी जँ रहितौं, लिखितौं नूतन ग्रंथ कोनो
रामक अग्नि परीक्षा लिखतौं, सीताकें बनवास जकाँ।
आखर पाछू भेद कतेको मुस्की भेल बिखाह कते
परसंसो धरि लागि रहल छै हुनक मुँहे उपहास जकाँ।
- पुस्तक : तेँ ओ बजलैए (पृष्ठ 84)
- रचनाकार : आनन्द मोहन झा
- प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
- संस्करण : 2023
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