Font by Mehr Nastaliq Web

सरिपहु अहाँ भैया कमाल करै छी

saripahu ahan bhaiya kamal karai chhi

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

सरिपहु अहाँ भैया कमाल करै छी

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    सरिपहु अहाँ भैया कमाल करै छी

    अछि भ्रष्ट आचरण मुदा गाल करै छी।

    पीबै छी गोनरिनर टीनक टीन छी

    लोकक लग आदर्शक ताल करै छी।

    घार जकाँ बसुलाक अपने दिस घूमल

    अपने के अपने नेहाल करै छी।

    कएल जे विरोध लटकल त्रिशंकु सन

    तरेतर तेहन ने जाल करै छी।

    हितैषी बोनिहारक नापक लेल बोनि

    अढ़ैया घट्टी, तरजू-टाल रखै छी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 24)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY