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समाजक रूप जँ झलकय तखन साकार

samajak roop jan jhalkay takhan sakar

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

समाजक रूप जँ झलकय तखन साकार

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    समाजक रूप जँ झलकय तखन साकार अछि कविता

    कतहु शृंगार अछि कविता कतहु अंगार अछि कविता

    जखन अन्याय केर बलपर करय क्यो देशपर शासन

    तखन जनता-जनार्दन लए बनै ललकार अछि कविता

    धरापर चतुर्दिक पापक जखन साम्राज्य पसरै छै

    तखन राम कृष्णक कोनो अवतार अछि कविता

    जखन दैहिक धरातलपर करय क्यो प्रेम ककरोसँ

    तखन मिलन अवसर लए मधुर-उपहार अछि कविता

    जखन क्यो ज्ञान-गंगामे लगाबय प्रेमसँ डुबकी

    तखन संजीवनी सन सरस रसधार अछि कविता

    लगय रुचिगर तखने टा जखन हो पेट दाना

    जतय अछि भूखकेर ज्वाला ततय बेकार अछि कविता

    समर्पण-भाव संग बाबा पहिर कऽ प्रेम केर चश्मा

    जतय देखू ओतय सभठाँ सगर संसार अछि कविता

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 5)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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