साँझ भरल, दीप जरल न आएल बोनिहार हमर
saanjh bharal, deep jaral na aayel bonihar hamar
कलानन्द भट्ट
Kalanand Bhatt
साँझ भरल, दीप जरल न आएल बोनिहार हमर
saanjh bharal, deep jaral na aayel bonihar hamar
Kalanand Bhatt
कलानन्द भट्ट
और अधिककलानन्द भट्ट
साँझ भरल, दीप जरल न आएल बोनिहार हमर
प्रतिक्षामे आँखि दुनू भेल अछि पथार हमर
घूमि अबैछ रोज-रोज ने लागैछ बोनि कतहु
भूख! भूख! भूखक लेल ज्वाला भकराड़ हमर
थिर रहतै प्राण कते अन्न बिना देह बीच
सागेटा करमी केर जिनगीक आधार हमर
होइतै जँ टिकसो केर टाका हम पठा दितिऐ
जा रहलै पनिजाब सभ होइतै उद्धार हमर
करवा ले कुटौनो-पिसान कोनाकऽ निकलू हम
अछि नेना पिहुआ, भेल नुआ तार-तार हमर
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 42)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
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