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मन उनकर कतना सहक

man unkar katna sahak

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

मन उनकर कतना सहक

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

और अधिकनागेन्द्र प्रसाद सिंह

    मन उनकर कतना सहक गइल बा

    सब उनकर करनी महक गइल बा

    हाल उनकर कहीं, कहीं का, ना बुझा

    चाल उनकर बहुते बहक गइल बा

    लूट, हतेया, बलात्कार सगरो मचल

    आग गजबे के देस में लहक गइल बा

    रोजे-रोजे नया उतपात करेलन

    देख जनता के छतिया दलक गइल बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर न सधे (पृष्ठ 39)
    • रचनाकार : नागेन्द्र प्रसाद सिंह
    • प्रकाशन : लोग प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2000

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