Font by Mehr Nastaliq Web

पेटकेँ पीठ बनाबी कोना हम कहियौ

petken peeth banabi kona hum kahiyau

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

पेटकेँ पीठ बनाबी कोना हम कहियौ

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    पेटकेँ पीठ बनाबी कोना हम कहियौ

    रातिकेँ दिनमे सजाबी कोना हम कहियौ।

    छै ने वस्त्र डाँड़मे कप्पो लपेटि रहि लेबै

    बिना अन्न भूख बुझाबी कोना हम कहियौ।

    पात कोबियोक आब हाटमे बिकय लागल

    सेहन्ता दालिक मेटाबी कोना हम कहियौ।

    हृदय मानल जे गरीबक अछि सूखल लकड़ी

    लगाकऽ आगि जराबी कोना हम कहियौ।

    सपना जे रहय भेलै बालुक गरम धरती

    फूल आसाक उगाबी कोना हम कहियौ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 9)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY