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ओ बादल खाली गरजै छै

o badal khali garajai chhai

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

ओ बादल खाली गरजै छै

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    बादल खाली गरजै छै—तेँ पूरत जलकेर आस कोना

    जे फूल बनल अछि कागतकेर तहँ भेटत कहू सुवास कोना

    जकरा ने हृदय छै अन्तरमे अछि व्यर्थ ओतए करुणा, विनती

    कियो बाजू तँ तरहत्थीपर उगि सकतै हरियर घास कोना

    जे अपनहि स्वार्थमे डूबल छै नीतिक गप्प कोना सुनत

    इजोत रातुक उल्लूकेँ भऽ सकतै कहियो रास कोना

    समठाम छै पसरल धोखा शोषण, हत्या, ईर्ष्या घृणा

    फाटल कपड़ा दरजी सीतै मुदा सीतै आकाश कोना

    संघर्षक नाम तँ जीवन थिक अपनहिसँ तेँ संघर्ष करी

    जकरा ने भरोसा अपनापर सुनतै ने उपहास कोना

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 30)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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