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ने रहल घूस, घूस व्यवहार बनल छै

ne rahal ghoos, ghoos vyvahar banal chhai

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

ने रहल घूस, घूस व्यवहार बनल छै

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    ने रहल घूस, घूस व्यवहार बनल छै

    युग आयल एहन की सदाचार बनल छै।

    ऊपरसँ नीचामे नीचासँ ऊपर घरि

    रेलक डिब्बा सन जोड़क जोगाड़ बनल छै।

    नेताकेँ पार्टी चलयबाक नामपर

    हाकिम लेल घरनीक हार बनल छै।

    ससरत ने काज कोनो आगाँ बिनु घूसक

    आइ घूसेक सभठाम बाजार गरम छै।

    कण-कणमे व्याप्त भेल जन-जनमे पसरल

    हनुमाने सन शक्तिक भंडार बनल छै।

    वैध ने करैछ सरकार किए एखन घरि

    जखन कोमलतम नाम 'उपहार' बनल छै।

    घूसक ने स्रोत कोनो जिनका छथि निन्दक

    आइ हुनके टा लेल कदाचार बनल छै।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 5)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

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