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मुस्की ने आबि सकतै कहियो

muski ne aabi sakatai kahiyo

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

मुस्की ने आबि सकतै कहियो

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    मुस्की ने आबि सकतै कहियो ठोरपर

    जिनगी कोना बितयबै आँखिकेर नोरपर

    कनिञे दया तँ करियौ जिनगी कठोरपर

    कहियो ने लोभ हमरा अनकर करोड़पर

    भरि पेट अन्न हमरा हेतै नसीब कहिया

    बितलै उमेर हमरो डोकाक झोरपर

    पैसाक युग आयल गुणक ने मोल होइछ

    दुनियाँ तँ मरि रहल अछि कारी गोरपर

    चेफरी पहिरि रहबै इज्जति ने हम गमयबै

    नीयत ने हम डिगयबै ककरो पटोरपर

    जनमे हमर भेलैए आफत जुलुम सहऽ लए

    आङुर ने उठतै ककरो जुल्मी चोरपर

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 22)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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