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मुँह देखि-देखि मुङबा बँटै छी अहाँ

munh dekhi dekhi mungba bantai chhi ahan

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

मुँह देखि-देखि मुङबा बँटै छी अहाँ

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    मुँह देखि-देखि मुङबा बँटै छी अहाँ

    लाभ जकरेसँ पात भरै छी अहाँ।

    चान दुतियाक क्रमसँ अघरपर बढ़य

    रंग गिरगिट जकाँ बदलै छी अहाँ।

    छी महामान्य विष-मधु भरल धैल सन

    ब्यूह रचिकऽ सहायक बनै छी अहाँ।

    डेग नापल उठय ने हुसल आइ तक

    धरा-अम्बरकेँ मुठिये रखै छी अहाँ।

    सभ जानय मुदा क्यो बाजैत अछि

    जे बाजय करेजे कटै छी अहाँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 2)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

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