मद-भरल रात अबहीं
mad bharal raat abhin
मद-भरल रात अबहीं बाकी बा
रस-भरल बात अबहीं बाकी बा
शोर बाटे भइल जे करनी के
ओकरे घात अबहीं बाकी बा
अनगिनत शह मिलल, मगर ऊ जे
दे सके मात अबहीं बाकी बा
कूच कइसे करब, समेटीं सब
ढेर सौगात अबहीं बाकी बा
रउवा 'नागेन्द्र' के कहाँ चिन्हलीं
भेंट-मुलकात अबहीं बाकी बा
- पुस्तक : सुर न सधे (पृष्ठ 27)
- रचनाकार : नागेन्द्र प्रसाद सिंह
- प्रकाशन : लोग प्रकाशन, पटना
- संस्करण : 2000
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