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कौन है जो मुझको

kaun hai jo mujhko

अमन मुसाफ़िर

अमन मुसाफ़िर

कौन है जो मुझको

अमन मुसाफ़िर

और अधिकअमन मुसाफ़िर

    कौन है जो मुझको भीतर रोकता है

    ख़ुद से ही जाने से बाहर रोकता है

    कौन मुझको बाँधता यादों से उसकी

    कौन दिल पर हाथ रखकर रोकता है

    कोई प्रतिमा रो रही इसमें छिपी-सी

    हाथ देकर एक पत्थर रोकता है

    मैं शहर जाता हूँ जब भी गाँव से तो

    घर पुराना एक जर्जर रोकता है

    खोजता था पहले नदियों को समंदर

    आज नदियों को समंदर रोकता है

    भावना से भावना कैसे मिले अब

    सबके अंदर कोई एक डर रोकता है

    रोकने से उसके रुकना चाहिए फिर

    कोई जब आँखों को भरकर रोकता है

    कोई जब हाथों से रोके लाज़िमी है

    कोई तो आँखों से खंज़र रोकता है

    झूठ के सैलाब में एक सत्य को वह

    धार के विपरीत जाकर रोकता है

    स्रोत :
    • रचनाकार : अमन मुसाफ़िर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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