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झूठा सब वरदान भइल बा

jhutha sab vardan bhail ba

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

झूठा सब वरदान भइल बा

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    झूठा सब वरदान भइल बा

    पूरा कब अरमान भइल बा

    जिनगी के बा कवन निशानी

    मउअत के सामान भइल बा

    नाव भँवर में नाचत बाटे

    घरवे में तूफान भइल बा

    बा पहिचान बनावल मुश्किल

    जानल सब अनजान भइल बा

    सब दिन बा हमरे निहुरे के

    अइसनके फरमान भइल बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : समय के राग (पृष्ठ 72)
    • संपादक : जगन्नाथ, भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : भोजपुरी साहित्य प्रतिष्ठान, पटना
    • संस्करण : 2003

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