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जे देवता सभक छल ओ चोर

je devta sabhak chhal o chor

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

जे देवता सभक छल ओ चोर

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    जे देवता सभक छल चोर भऽ गेलै

    ज्ञान-पूँज रहितो लतखोर भऽ गेलै

    सभ दिन ठकि रहल छल मीत बनि कोनाकऽ

    परदा जखन हटल छै तँ शोर भऽ गेलै

    उनटा बसात बहलै उन्मत्त भऽ कोम्हरसँ

    सभ दिनसँ चुप्प छल जे मुँहजोर भऽ गेलै

    मन्दिर जखनसँ बनलै अपकर्मकेर अड्डा

    आतंक, डर चिन्ता घनघोर भऽ गेलै

    एक बाढ़ि तेहन अयलै छद्म-वंचनाकेर

    विश्वास दहि गेलै सभ हिलकोर भऽ गेलै

    ककरो ने आब कहबै दुःख-वेदना अपन हम

    संगी हमर तँ एसकर बस नोर भऽ गेलै

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 20)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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