हम सबके आँसुअन के मिजान बा गजल
hum sabke ansuan ke mijan ba gajal
हम सबके आँसुअन के मिजान बा गजल
दुख भरल राग के पहचान बा गजल
आज सगरो मचल बा—महाभारत
हो गइल इहाँ लहू-लुहान बा गजल
बह रहल बाड़ी सगरी शोक के गंगा—
जीअत लाश से भरल मसान बा गजल
लउके कतहीं ना, खुशियन के मेला
लागत सुनसान ह, वीरान बा गजल
छितराइल बा सबद के आखर-आखर
अरथ के जइसे ढह गइल मकान बा गजल
- पुस्तक : अचके कहा गइल [ग़ज़ल-संग्रह] (पृष्ठ 7)
- रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
- प्रकाशन : कबीर भोजपुरी पुस्तकालय, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1992
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.