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हम सबके आँसुअन के मिजान बा गजल

hum sabke ansuan ke mijan ba gajal

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

हम सबके आँसुअन के मिजान बा गजल

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    हम सबके आँसुअन के मिजान बा गजल

    दुख भरल राग के पहचान बा गजल

    आज सगरो मचल बा—महाभारत

    हो गइल इहाँ लहू-लुहान बा गजल

    बह रहल बाड़ी सगरी शोक के गंगा—

    जीअत लाश से भरल मसान बा गजल

    लउके कतहीं ना, खुशियन के मेला

    लागत सुनसान ह, वीरान बा गजल

    छितराइल बा सबद के आखर-आखर

    अरथ के जइसे ढह गइल मकान बा गजल

    स्रोत :
    • पुस्तक : अचके कहा गइल [ग़ज़ल-संग्रह] (पृष्ठ 7)
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : कबीर भोजपुरी पुस्तकालय, मुजफ्फरपुर
    • संस्करण : 1992

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