Font by Mehr Nastaliq Web

थाकल-हारल सुरुज लगै छथि, चानो कनिक उदास जकाँ

thakal haral suruj lagai chhathi, chano kanik udaas jakan

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

थाकल-हारल सुरुज लगै छथि, चानो कनिक उदास जकाँ

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    थाकल-हारल सुरुज लगै छथि, चानो कनिक उदास जकाँ

    थड़-थड़ काँपि रहल दीपक लौ कोनो गरीबक आस जकाँ।

    मोजर बूढ़-पुरानक एतबे करथु दलानक रखबारी

    काटि रहल छथि जीवन देखू बिनु वेतन अवकास जकाँ।

    मंजिल धरि पहुँचेलौं जकरा लूटि लेलक बीच डगर

    अन-मन कहबी सन हालति अछि मडुआ रोपि उपास जकाँ।

    बाल्मीकि-तुलसी जँ रहितौं, लिखितौं नूतन ग्रंथ कोनो

    रामक अग्नि परीक्षा लिखतौं, सीताकें बनवास जकाँ।

    आखर पाछू भेद कतेको मुस्की भेल बिखाह कते

    परसंसो धरि लागि रहल छै हुनक मुँहे उपहास जकाँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : तेँ ओ बजलैए (पृष्ठ 84)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2023

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY