गंभीर भेल, मोन सिहकल बसात कोन
gambhir bhel, mon sihkal basat kon
गंभीर भेल, मोन सिहकल बसात कोन
उतरल अछि अम्बरसँ नहुँए परात कोन।
छल जे इजोत केर आइ हमर आश गेल
कयलक अभिलाषपर, घातेपर घात कोन।
आनब हम चान तोड़ि कहने छल घरतीपर
छीनैछ ओ बोल आब ई भेलै बात कोन।
देखल ने देह-दशा दर्दो थिक वस्तु कोनो
बुझल ने गाम, नगर, डगर, कुश-काँट कोन।
मुरझायल प्राण हमर प्रीतक परिणाम ई
बिसरि गेल सत्तामे बाट आ कुबाट कोन।
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 18)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
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