Font by Mehr Nastaliq Web

एकटा तलाश जारी छै

ekta talash jari chhai

राम चैतन्य धीरज

राम चैतन्य धीरज

एकटा तलाश जारी छै

राम चैतन्य धीरज

और अधिकराम चैतन्य धीरज

    अपन प्राण अपनहिं तरासि रहल छी

    एकर बाद आर की तलाशि रहल छी।

    हालहीन खेत परांट पड़ल-ए

    बलबत्तर हऽरसँ चासि रहल छी।

    काँट केर आसपर लाश टूटि गेल

    भरले जुआनी बुढ़ासि रहल छी।

    मालगाड़ी भरि गेल कुण्ठा-संत्राससँ

    बचल-बोझ कतय-कोना आशि रहल छी।

    अलकोहल मात्रा तँ बढ़िते जा रहल

    बासि, बासि तकरा तेबासि रहल छी।

    सीमा तँ विधवा तकर बाद फेर की

    शेष प्रश्न चिह्नकें निगहासि रहल छी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : द्विपर्णा [मैथिली गीत एवं गजल] (पृष्ठ 31)
    • रचनाकार : राम चैतन्य धीरज
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1982

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY