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छोड़ू अपन कपटकेँ आ उदार

chhoDu apan kapatken aa udaar

बाबा बैधनाथ

बाबा बैधनाथ

छोड़ू अपन कपटकेँ आ उदार

बाबा बैधनाथ

और अधिकबाबा बैधनाथ

    छोड़ू अपन कपटकेँ उदार बनू भैया

    गाँधी, सुभाष, नेहरूक अवतार बनू भैया

    कपटी-छली एम्हर फेर गरदनि उठा रहल अछि

    आबो नयन तँ फोलू ललकार बनू भैया

    घीँचैछ बोच बनिकऽ भारतके भँवरमे

    डूबैत अपन देसक पतवार बनू भैया

    कर्मठ बनल रहब जँ काजक ने फेर कमी छै

    मेहनति करू खुदसँ रोजगार बनू भैया

    अप टा स्वार्थमे सभ निसभेर भऽ सुतल छी

    अप्पन बनाकऽ सभकेर गरहार बनू भैया

    पशुवत् ओकर छै जिनगी अपना लए जे जिबैए

    जनहित करू देसक शृंगार बनू भैया

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहरा इमानपर (मैथिली गजल-संग्रह) (पृष्ठ 23)
    • रचनाकार : बाबा बैधनाथ
    • प्रकाशन : गौरी प्रकाशन, कचहरी बलुआ, पूर्णिया
    • संस्करण : 1989

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