बिका रहल आज सरे बाजार आदमी
bika rahal aaj sare bajar adami
बिका रहल आज सरे बाजार आदमी
बिकनिहार आदमी बा, कीननिहार आदमी
कब तक ले ढोई बोझ, लहू के तेल से
सवारी भी आदमी ह आ सवार आदमी
पइसा, पद, पैरवी के युग-जहान में
आदमी प पड़ रहल वरियार आदमी
कइसे भरोसा कर सकी राही प राह में
आदमी के लूट लिहल-बटमार आदमी
देवे जवाब रोड़ा के पत्थर से धार के
तलवार आदमी, त छिपल कटार आदमी
- पुस्तक : अचके कहा गइल [ग़ज़ल-संग्रह] (पृष्ठ 8)
- रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
- प्रकाशन : कबीर भोजपुरी पुस्तकालय, मुजफ्फरपुर
- संस्करण : 1992
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