भेल जिनगी जहर, आब जीबै कोना
bhel jingi jahar, aab jibai kona
भेल जिनगी जहर, आब जीबै कोना
जखन दिने अन्हार, राति कटबै कोना
ठूँठ भेल गाछ जकाँ गिरहत उदास छै
हम छी लत्ती बिन सूँढ़क लतरबै कोना
बसातो बगदि गेल फुटहोपर आफत
पानिए ने, हम डोका तकबै कोना
लागल पराहि सभ गाम-घर छोड़ि रहल
बेमार बुढ़िया हम छोड़ि जयबै कोना
खयबा ले पात लोक भेल मजबूर आइ
हम काल ई अकालक बितयबै कोना
- पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 40)
- रचनाकार : कलानन्द भट्ट
- प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
- संस्करण : 1983
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