Font by Mehr Nastaliq Web

अन्तरमे नित्य महाभारत चलैए

antarme nitya mahabharat chalaiye

कलानन्द भट्ट

कलानन्द भट्ट

अन्तरमे नित्य महाभारत चलैए

कलानन्द भट्ट

और अधिककलानन्द भट्ट

    अन्तरमे नित्य महाभारत चलैए

    घेरा व्यूहमे अभिमन्यू मरैए

    अपन आँत अपने पका आगिमे

    बैसल गाछ तर, भीम भूखल चखैए

    छै डाका पड़ल घर, खसल वज्र नभसँ

    माथपर हाथ घयने युधिष्ठिर कनैए

    आन्हरक सन्तान सह-सह करै अछि

    अर्जुनकेँ सभ क्यो नपुंसक कहैए

    बिना वस्त्र कृष्ण घयल बाट बोनक

    भयसँ दुःशासन केर थर-थर कँपैए

    स्रोत :
    • पुस्तक : कान्ह पर लहास हमर [मैथिली गजल संग्रह] (पृष्ठ 34)
    • रचनाकार : कलानन्द भट्ट
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 1983

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY