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मद-भरल रात अबहीं

mad bharal raat abhin

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

मद-भरल रात अबहीं

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

और अधिकनागेन्द्र प्रसाद सिंह

    मद-भरल रात अबहीं बाकी बा

    रस-भरल बात अबहीं बाकी बा

    शोर बाटे भइल जे करनी के

    ओकरे घात अबहीं बाकी बा

    अनगिनत शह मिलल, मगर जे

    दे सके मात अबहीं बाकी बा

    कूच कइसे करब, समेटीं सब

    ढेर सौगात अबहीं बाकी बा

    रउवा 'नागेन्द्र' के कहाँ चिन्हलीं

    भेंट-मुलकात अबहीं बाकी बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : सुर न सधे (पृष्ठ 27)
    • रचनाकार : नागेन्द्र प्रसाद सिंह
    • प्रकाशन : लोग प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 2000

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