तोहरा गठरी में लागल बड़ुए चोर बबुआ
तोहरा गठरी में लागल बड़ुए चोर बबुआ
हो जा अबहूं से, तूहूं अंखफोर बबुआ
मुंह से बोलत बा श्रीराम
करत रावन के बा काम
कुर्सी खातिर देखऽ लगवले बड़ुए जोर बबुआ
भेख बनवले बा केसरिया
भीतर बड़ुए बहुते करिया
गहुंमन खातिर अब त बने के बा मोर बबुआ
करि के किसिम किसिम के टीका
लेता बड़का-बड़का ठीका
कबले सूतल रहबऽ, देखऽ भइल भोर बबुआ
अमेरिका के ई बनल दलाल
बनावत बा रेशम के जाल
खुरपी ले के चलऽ छीले एकर सोर बबुआ
ई ह दंगा के सरदार
खाली बोली बा रसदार
आगे बढ़ऽ होवे लागल अंजोर बबुआ
तोहरा गठरी में लागल बड़ुए चोर बबुआ।
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 79)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
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