Font by Mehr Nastaliq Web

उलझे सारे तंतु ह्रदय के

uljhe sare tantu hrday ke

विशाल समर्पित

विशाल समर्पित

उलझे सारे तंतु ह्रदय के

विशाल समर्पित

और अधिकविशाल समर्पित

    उलझे सारे तंतु ह्रदय के इसीलिए उलझी है भाषा

    जाने कब से खोज रहे हैं हम संबंधो की परिभाषा

    भाग्य देवता रूठ रहे हैं मन में तारे टूट रहे हैं

    लेकिन कौन जान पाया है टूटे तारे कहाँ गए

    अंधियारा ही अंधियारा है

    सब उजियारे कहाँ गए?

    आँखों मे आँसू लाता है रिश्तों का हर एक कथानक

    वे भी आँसू दान कर गए जो थे मुस्कानो के मानक

    तथाकथित देवों की हमने बढ़ती देखी नित्य पिपासा

    इसीलिए रह गया हमारे अरमानों का पौधा प्यासा

    आँखो से बह निकले आँसू गहरी प्यासें छिछले आँसू

    कोई नहीं जान पाया है

    आँसू खारे कहाँ गए?

    इस चेहरे से उस चेहरे तक भटक रही हर ओर उदासी

    किन महलों मे कैद हुई है आख़िर सुख की पूरनमासी

    कभी नहीं भर पाया दुःख के सन्यासी का खाली कासा

    दुःख की देहरी का हर दीपक क्यों रहता है बुझा बुझा सा

    मन में रहे उमड़ते अक्सर सौ सौ प्रश्नों के सौ सागर

    कोई नहीं जान पाया है

    उत्तर सारे कहाँ गए?

    कुछ आँसू कुछ थकन उदासी और साथ कुछ क्लेश बचे हैं

    इनकी सबकी अगुवाई में हम ही केवल शेष बचे हैं

    लो हमने अनसुना कर दिया बजता रहा युद्ध का तासा

    और हमारे अश्वमेघ का अस्व लग रहा थका थका-सा

    दुःख के सारे दिन बीते हैं देखे दुनिया हम जीते हैं

    कोई नहीं जान पाया है

    वे दिन हारे कहाँ गए?

    स्रोत :
    • रचनाकार : विशाल समर्पित
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY