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तीर्थ कोई पा लिया हमने

teerth koi pa liya hamne

ओम निश्चल

ओम निश्चल

तीर्थ कोई पा लिया हमने

ओम निश्चल

और अधिकओम निश्चल

    तीर्थ कोई पा लिया हमने

    जब लिया अँकवार में तुमने।

    तुम मिले तो याद घिर आई

    एक स्मिति चित्त में छाई

    फिर उमड़ आए दृगों में जल

    वेदना की साँझ गहराई

    झिलमिलाए फिर पुराने दिन

    आँख में सपना लगा तिरने।

    तुम थे तो ज़िंदगी कम थी

    रोशनी में रोशनी कम थी

    हास से उल्लास ओझल था

    आँसुओं में भी नमी कम थी

    उँगलियों में भर गया कंपन

    कनखियों से जो छुआ तुमने।

    बो गया अहसास कोई फिर

    छंद-सा नवगीत की धुन में

    भर गया चुपचाप ज्यों कोई

    फिर अपरमित रंग सावन में

    खुल गई मन में लगी साँकल

    साँस में पुरवा लगी बहने।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ओम निश्चल
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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