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आन्ही आइल पानी आयल

aanhi aail pani aayal

रामजियावान दास ‘बावला’

रामजियावान दास ‘बावला’

आन्ही आइल पानी आयल

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    आन्ही आइल पानी आयल करै लगल लड़िकया,

    मोर गड़इया ले गयल॥

    डकरैलीं अहरी पर गइया मोर मड़इया ले गयल॥

    खाट बिछावन ओढ़ना भींजहा सतुवा और पिसान।

    गोंइठा गोहरी लकड़ी भींल कलपत भयल विहान॥मोर॥

    सगरो बचल वा बप्पा मइया मोर मड़इया ले गयल॥

    ढहि गइलीं दिवार बनावल बहिगा चूल्हा चउका।

    भूख लगल बा माई कहि-कहि रोवैं छउकी छउका॥मोर॥

    भीजत-भीजत सड़ल रजइया मोर मड़इया ले गयल॥

    भूसा पुअरा सड़ै भींज के नद्दी नार फफायल।

    आधी रात के पुरवा पर से घुखा वा चिल्लायल॥मोर॥

    रतिया आवै ना उँहइया मोर मड़इया ले गयल॥

    मकई जोन्हरी बजरी नाहीं बोअल गइल उतइला।

    आगम कुल अन्हियार लगतबा हे विधिना का कइला॥मोर॥

    सूझत नाहीं एक उपइया मोर मड़इया ले गयल॥

    बरदा बछरू कहाँ ढुकाई कुकुरो भयल उदास।

    में-में कुल बकरी चिचियालीं पतई मिलै घास॥मोर॥

    कोने कुकरैले पिलइया मोर मड़इया ले गयल॥

    घर से निकलन गाढ़ लगत बा भींजल कपड़ा लत्ता।

    जर जोखाम बा जोर पकड़ले हमें बतावै धत्ता॥मोर॥

    घर-घर लोग 'बावला' भइया मोर मड़इया ले गयल॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीत मंजरी
    • संपादक : हरिराम द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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