संउसे देसवा मजूर, रउआ काम लिहीं जी
sanuse desva majur, raua kaam lihin ji
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
संउसे देसवा मजूर, रउआ काम लिहीं जी
sanuse desva majur, raua kaam lihin ji
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
संउसे देसवा मजूर, रउआ काम लिहीं जी,
रउआ नेता हईं, हमरो सलाम लिहीं जी।
रउआ गद्दावाली कुरूसी प बइठल रहीं,
जनता भेड़-बकरी ह, ओकर चाम लिहीं जी।
रउआ पटना भा दिल्ली में बिरजले रहीं,
केहू मरे, रउआ रामजी के नाम लिहीं जी।
चाहे महंगी बढ़े, चाहे लड़े रेलिया
रउआ होटल में छोकरिअन से जाम लिहीं जी।
केहू कुछुओ कहे त मंहटिअवले रहीं,
रउआ पिछली दुअरिया से दाम लिहीं जी।
ई ह गांधी जी के देस, रउआ होई ना कलेस,
केहू कांपता त कांपे, रऊआ घाम लिहीं जी।
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 30)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
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