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सगे भाई की तरे

sage bhai ki tare

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

और अधिकरामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

    सबकी दुख सुख में रहीं सगे भाई की तरे।

    तबो अरिया चलावे लोग कसाई की तरे॥

    धरती की लोगवा के सुख पहुँचाईं।

    देके दवाई सबके रोगवा भगाईं॥

    केतना स्वारथी बा लोगवा बताईं के तरे॥...

    अमवा कहेला आपन रोइ के विपतिया।

    महुआ के नींद नाहीं आवे दिन रतिया॥

    अब रोवेले जमुनिया लुगाई की तरे॥...

    निमिया कहेले हम हईं दुख हरनी।

    फायदा उठा के लोग भूलि जाला करनी॥

    हम बेनिया डोलाईं रोज माई की तरे॥...

    छहियां में हमरी लोगवा जुड़ाला।

    फल खाके सब केहू केतना अघाला॥

    बंशी चैन के बजावे लोग कन्हाई की तरे॥...

    एही तरे धरती के पेड़ जो कटाई।

    बची ना केहू विपत्ति सब पर आई।

    लोगवा समझे ना बाति समुझाईं के तरे॥...

    स्रोत :
    • पुस्तक : गँउवा के माटी अनमोल (पृष्ठ 15)
    • रचनाकार : रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’
    • प्रकाशन : अखिल भारतीय भोजपुरी समाज, गोमतीनगर, लखनऊ
    • संस्करण : 2010

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