पिया, हमरा के काहे भुलाइ गइला?
piya, hamra ke kahe bhulai gaila?
पिया, हमरा के काहे भुलाइ गइला?
एक बरिस बीत गइल, ना आइल पतिया
कइसे अकेले हम, कार्टी बिपतिया,
पिया, दुनिया से काहे डेराइ गइल?
गांव-घर हमरा प बोलेला बोलिया,
काढ़े करेजवा कुहुंकके कोइलिया,
पिया, नगरी में जा के हेराइ गइल?
महंगी से मचल बा बहुते तबाही,
चूल्हा पर रोजे ना चढ़े कराही,
पिया, जेहल में हमके बिठाइ गइलऽ
पिया, हमरा के काहे भुलाइ गइलऽ?
- पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 26)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 2009
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