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नेह के पांती

neh ke panti

गोरख पांडेय

गोरख पांडेय

नेह के पांती

गोरख पांडेय

और अधिकगोरख पांडेय

    तूं हवऽ श्रम के सुरुजवा हो, हम किरिनिया तोहार

    तोहरा से भगली बन्हनवा के रतिया

    हमरा से हरियर भइली धरतिया

    तूं हवऽ जग के परनवा हो, हम संसरिया तोहार

    तूं हवऽ श्रम के सुरुजवा हो, हम किरिनिया तोहार।

    तोहरा से डगरेला जिनगी के पहिया

    हमरा से वन-वन उपजेले रहिया

    रचना के हवऽ तूं बसूलवा हो, हम रुखनिया तोहार

    तूं हवऽ श्रम के सुरुजवा हो, हम किरिनिया तोहार।

    हमरा के छोड़िके जइहऽ बिदेसवा

    जइहऽ भूलिहऽ भेजल सनेसवा

    तूं हवऽ नेहिया के पतिया हो, हम अछरिया तोहार

    तूं हवऽ श्रम के सुरुजवा हो, हम किरिनिया तोहार।

    तोहरे हथौड़वा से कांपे पूंजीखोरवा

    हमरे हंसुअवा से हिले भूंइखोरवा

    तूं हवऽ जूझे के पुकरवा हो, हम तुरहिया तोहार,

    तूं हवऽ श्रम के सुरुजवा हो, हम किरिनिया तोहार।

    चाहे जहां रहऽ जो मथवा झुकइवऽ

    हमरा के हरदम संगे-संगे पइबऽ

    तूं हवऽ मुकुति के धरवा हो, हम लहरिया तोहार

    तूं हवऽ श्रम के सुरुजवा हो, हम किरिनिया तोहार।

    स्रोत :
    • पुस्तक : गोरख पाण्डेय के भोजपुरी गीत (पृष्ठ 20)
    • संपादक : जीतेन्द्र वर्मा
    • रचनाकार : गोरख पाण्डेय
    • प्रकाशन : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास
    • संस्करण : 2009

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