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मुश्किल हुआ निबाह

mushkil hua nibah

विभूति तिवारी

विभूति तिवारी

मुश्किल हुआ निबाह

विभूति तिवारी

और अधिकविभूति तिवारी

    पैसा भले नहीं था लेकिन 

    जीवन था ख़ुशहाल।

    साफ़ हवा थी अमरित जल था 

    जंगल पालनहार॥ 

    तेंदू, चार, मकोय, करौंदा 

    महुआ की भरमार। 

    कंद-मूल-फल, हरड़-आँवला

    निसदिन के उपहार॥  

    जड़ी-बूटियों से होता था 

    जन-जन का उपचार।

    साफ़ हवा थी अमरित जल था 

    जंगल पालनहार॥

    ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, 

    साँवा, काकुन बोते।

    मूँग, उड़द, अरहर, सरसों संग 

    मड़िया, मक्का होते॥ 

    फ़सलें जब कटकर घर आती  

    तब आते त्यौहार। 

    साफ़ हवा थी अमरित जल था 

    जंगल पालनहार॥  

    दे बहुमूल्य चिरौंजी लाते 

    सस्ता नमक बेसाह। 

    नज़र लगी जब से विकास की 

    मुश्किल हुआ निबाह॥  

    चौतरफ़ा मँडराए संकट 

    दिखे तारणहार।  

    साफ़ हवा थी अमरित जल था 

    जंगल पालनहार॥

    स्रोत :
    • रचनाकार : विभूति तिवारी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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