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मारैला सवनवाँ कटार हो

maraila savanvan katar ho

रामजियावान दास ‘बावला’

रामजियावान दास ‘बावला’

मारैला सवनवाँ कटार हो

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    मारैला सवनवाँ कटार हो अँगनवा फुहार परै ननदी।

    नाहीं अइलें वीरना तोहार हो अँगनवा फुहार परे ननदी।

    पतिया पठाय बोलवाय नाहीं देतू।

    नाहीं होवै तोहसे उधार हो अँगनवा फुहार परै ननदी।

    पतिया में लिखि दा करेर बरसतिया।

    लिखि दा पपिहरा पुकार हो अंगनवा फुहार परै ननदी।

    कजरी में कजरा लगाय का करबै।

    मोरे लेखे दुनियाँ अन्हार हो अँगनवा फुहार परै ननदी।

    जिव मोर भयल बावला लिखि दा।

    रतिया बखतिया पहार हो अँगनवा फुहार परै ननदी॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 132)
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
    • संस्करण : 1997

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