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भाग्य रेखाओं में तुम कहीं भी न थे

bhagya rekhaon mein tum kahin bhi na the

अमन अक्षर

अमन अक्षर

भाग्य रेखाओं में तुम कहीं भी न थे

अमन अक्षर

और अधिकअमन अक्षर

    भाग्य रेखाओं में तुम कहीं भी थे

    प्राण के पार लेकिन तुम्हें देखते

    साँस के युद्ध में मन पराजित हुआ

    याद की अब कोई राजधानी नहीं

    प्रेम तो जन्म से ही प्रणयहीन था

    बात लेकिन कभी हमने मानी नहीं

    हर नए युग तुम्हारी प्रतीक्षा रही

    हर घड़ी हम समय से अधिक बीतते

    एक तरफ़ आस के कुछ दीए जल उठे

    एक तरफ़ मन विदा गीत गाने को है

    प्रिय इस जन्म भी कुछ पता चला

    प्यार आता है या सिर्फ़ जाने को है

    जो सहज जी गए तुम हमारे बिना

    हम वो जीवन तुम्हारे ही संग सीखते!

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक लड़की (पृष्ठ 70)
    • रचनाकार : अमन अक्षर
    • प्रकाशन : हिन्द युग्म
    • संस्करण : 2024

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