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कुरसी-कुरसी खेल खेलै छी

kursi kursi khel khelai chhi

विभूति आनंद

विभूति आनंद

कुरसी-कुरसी खेल खेलै छी

विभूति आनंद

और अधिकविभूति आनंद

    देशक भवितव भुतियायल अछि,

    हम ओकरा ले' राम-रहीम

    खद्धर-युद्धक बीच फँसल अछि,

    आजुक चिन्तन वाम-दहीन

    हम बैरागी हमरा की अछि

    हम तँ गाँधी-बाट चलै छी

    कुरसी-कुरसी खेल खेलै छी!

    पाँच साल के लमनचूस दऽ,

    मतदाता सँ माँगी भीख

    चतुर खेलाड़ी हम मोहवा के,

    सकल चोटमे हमरे चीख

    घाम-पसेना करय चिरौरी

    हम सोनित के तेल पिबै छी

    कुरसी-कुरसी खेल खेलै छी!

    ई प्रतीक कुरसी अछि हम्मर,

    हम शासन करबौ निर्भीक

    तों ता हम्मर शल्यक्रिया कर,

    खन ढेका खन टीकी घीच

    तुकबंदी केर एही शिल्पपर

    हम सभ जनता-जाप करै छी

    कुरसी-कुरसी खेल खेलै छी!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पीयर रौद पियरगर धरती (गीत-संग्रह) (पृष्ठ 61)
    • रचनाकार : विभूति आनन्द
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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