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कौन है जो इस अंतरबन में बैरागी

kaun hai jo is antarban mein bairagi

क्षितिज

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कौन है जो इस अंतरबन में बैरागी

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    कौन है जो इस अंतरबन में बैरागी विचरण करता है?

    जाने किससे, किन बातों पर, किसकी ख़ातिर रण करता है?

    किसकी आस में प्यासी नदिया लहरें बन तट पर आती है?

    किसके दुःख में प्रतिपल आतुर, मस्त हवा बिरहा गाती है?

    कौन है जिसने नाम लिखा है, पग-पग धरती पर बादल का?

    किसकी छुवन की लपट हृदय का कोना-कोना झुलसाती है?

    किससे मिलन में संकल्पित मन मिट जाने का प्रण करता है

    कौन है जो इस अंतरबन में बैरागी विचरण करता है?

    कोई तो है जो मेरे अंदर मेरी ख़ातिर बिलख रहा है!

    कोई तो है जो खोज में प्रियतम की जन्मों से भटक रहा है!

    कोई तो है जो साथी बनकर सहभागी है मेरे दुःख का!

    कोई तो है जो मुस्कानों का पर्दा लेकर सिसक रहा है!

    हर इक डाल पे झूल-झूल कर स्वप्नों का तर्पण करता है।

    कौन है जो इस अंतरबन में बैरागी विचरण करता है?

    कौन है जिसका नाम लिया तो, चंदन हो गई मेरी काया

    कौन है जिसने इन सासों को, होने का मतलब समझाया

    जितने सुलझे खेल प्रणय के, उतनी उलझी इसकी माया

    नासमझों के हाथ में मोती, बुद्धिमान को समझ आया

    हर क्षण जन्म नया लेता है, हर क्षण मृत्यु वरण करता है।

    कौन है जो इस अंतरबन में बैरागी विचरण करता है?

    स्रोत :
    • रचनाकार : क्षितिज
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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