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कलकतवा से मोर पिया

kalakatva se mor piya

महेन्द्र मिसिर

महेन्द्र मिसिर

कलकतवा से मोर पिया

महेन्द्र मिसिर

और अधिकमहेन्द्र मिसिर

    (पूरबी)

    कलकतवा से मोर पिया

    अइहें कि दू ना?

    चार महीना

    जाड़ा-पाला के दिनवाँ,

    पिया हमके रजइया

    ओढ़इहें कि दू ना?

    कलकतवा से...

    चार महीना

    पसेनवाँ के दिनवाँ,

    पियवा रसे-रसे बेनिया

    डोलइहें कि दू ना?

    कलकतवा से...

    चार महीना

    बरसात के दिनवाँ,

    पियवा हमरा के छातावा

    ओढ़इहें कि दू ना?

    कलकतवा से...

    कहत महेन्दर

    पिया छछनेला जिया

    पिया हमरो जवनियाँ

    जुरइहें कि दू ना?

    पिया हमरो आसरवा

    पुरइहें कि दू ना?

    कलकतवा से...

    स्रोत :
    • पुस्तक : महेन्द्र मिसिर के चुनिंदा भोजपुरी गीत (पृष्ठ 86)
    • संपादक : भगवती प्रसाद द्विवेदी
    • रचनाकार : महेन्द्र मिसिर
    • प्रकाशन : सर्व भाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2021

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