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कइसे खेले जईबू सावन में

kaise khele jaibu savan mein

अज्ञात

अज्ञात

कइसे खेले जईबू सावन में

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया

    बदरिया घेरी आईल ननदी

    तू तऽ जात हउऐ अकेली, कोई संग सहेली

    गुण्डा रोकी लिहें तोहरी डगरिया

    बदरिया घेरी आईल ननदी…

    भौजी बोलेलु तू बोली, सुनके लागे हमके गोली

    काहे परल बारू हमरी नजरिया

    बदरिया घेरी आईल ननदी…

    कितने दामुल फाँसी पड़ गइले

    कितने पीसत होइहें जेहल में चकरिया

    बदरिया घेरी आईल ननदी…।

    स्रोत :
    • पुस्तक : भोजपुरी के रसगर गीत (पृष्ठ 23)
    • संपादक : तुलसीदास
    • प्रकाशन : लोक साहित्य संगम, बिहिया, भोजपुर, बिहार

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