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गिट्टी ऊ तूड़े

gitti uu tuDe

मूंगालाल शास्त्री

मूंगालाल शास्त्री

गिट्टी ऊ तूड़े

मूंगालाल शास्त्री

और अधिकमूंगालाल शास्त्री

    तीन मोहानी पर गिट्टी तूरे,

    फोरेला ईंटा चंगार हो।

    हथउर से हम्मर धब्बर-धब्बर,

    राही से करे रोज रार हो॥

    ठटरी के फटरी लुकावे ना जामा,

    पांजर के पेवन चेथार हो।

    जाड़ा बा जामा ईहाँ घामा पाजामा,

    चादर बा बहत बेयार हो॥

    लेत बाटे जम्भाई काल्हे के खराई,

    कि भइल बा बोखार हो।

    ईहाँ पसेना बा एड़ी से चोटी,

    बहता बाकिर धइले डांर हो।

    शिव पूजे पथल ना फूल ना गंगा जल,

    अरघ पसेना के धार हो।

    सूखल ओठवा के फेफरी जे रोए,

    खून रिसेला दे दरार हो।

    अँखिया गड़ा के फोरे, रोटियो ओने अगोरे,

    भीतर मचल बा हाहाकार हो॥

    ****

    आंकर-पाथर ईंटा हम फोड़ी

    फूटल ना भाग बरियार हो।

    जो भाग फूटित फूटि के जुटित

    झुकित ना जिनिगी के डार हो॥

    सड़क हमही सँवारी दउरे जवन सवारी

    हँसे हवा के थप्पर मार हो॥

    गैरेज कोठा अटारी, तू ही कइल तइयारी,

    अबतू डँटालऽ होत खार हो॥

    नदिया का छाती पर पाया गिटी के बनल

    तब जाके बन्हल किनार हो।

    एह पार ओह पार घाट मिलाई यार

    ना मिलल घाट हमार हो॥

    हमरे रोड़ा खोआ पर मन्दिर बा अड़ल

    कलश के लेल इजहार हो।

    बील बनावे मूस साँप पुजारी घुस

    हमरा ला करे बन किवाड़ हो॥

    एक-एक के फूटो भाग, आपस में जुटो आज,

    जुटि के हो जाव पहाड़ हो।

    अंगुरी पर दिन गिनऽ का तू जिअ सुहागिन

    भर बाँह चूड़ी ना तऽ राँड़ हो॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : भिनुसार हो गइल (पृष्ठ 17)
    • रचनाकार : मूंगालाल शास्त्री
    • प्रकाशन : भोजपुरी भारती, सारण
    • संस्करण : 2016

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