हम किसान के बेटा, धरती मइया हई हमार
hum kisan ke beta, dharti maiya hai hamar
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
हम किसान के बेटा, धरती मइया हई हमार
hum kisan ke beta, dharti maiya hai hamar
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
हम किसान के बेटा, धरती मइया हई हमार,
हँसुआ-खुर्पी, हल-कुदाल हउए हमार हथियार।
चिंरइन के बोले के पहिले
हम खटिया छोडीं ला
अपना माल-मवेसिन से
हरदम नाता जोड़ींला,
बैल हमार हवन स बाजू, बछवा ह पतवार।
खून-पसेना में अब ले हम
फरक कबो न कइनीं
जाड़ा-गरमी-बरखा के सभ
मार हमेसा सहनीं
चान-सुरूज, बादर-बिजुली, हउए हमार संसार,
भरल जवानी में हम आपन
खेत अगोरत रहनीं
घाव करेजा के जब टभकल
मेहरि से ना कहनीं
एह जनम में ना जनलीं, रसदार बात-बेवहार,
हम किसान के बेटा, धरती मइया हई हमार।
- पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 8)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 1993
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