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घूमत बाटे शान से

ghumat bate shaan se

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

घूमत बाटे शान से

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    खेलवा खेलत बाटे हमनी के जान से,

    घूमत बाटे शान से ना।

    जेकरा डर नइखे विधि विधान से,

    घूमत बाटे शान से ना।

    चिरई के जान जाला, लइका के खेलवना,

    लाते-लाते तूड़ देला बनल घेरवना;

    कवनो अफशोस नइखे नफा-नुकशान से,

    घूमत बाटे शान से ना।

    चाहे कश्मीर होखे, चाहे बिहार बा,

    मटिए के मोल लेलीं बिकत हथियार बा;

    गाँवा-गाँई डेगे-डेग सजल दुकान से,

    घूमत बाटे शान से ना।

    जेकरा बा गोली-गंठा ओकरे वोट बा

    लोकतंत्र बेचारा भइल खात बढ़िया चोट बा;

    मतलब नइखे कवनो जेकरा देसवा का मान से,

    घूमत बाटे शान से ना।

    दागी-अपराधियन के रजनीतिए से मेल बा,

    जे बा सही जनसेवक, उहे अब फेल बा;

    डरवा नइखे लागत गीता कुरान से,

    घूमत बाटे शान से ना।

    स्रोत :
    • पुस्तक : खरकत जमीन बजरत आसमान (पृष्ठ 109)
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट (बोकारो)
    • संस्करण : 2015

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