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अभिशापित शिला

abhishapit shila

छत्रानन्द सिंह झा

छत्रानन्द सिंह झा

अभिशापित शिला

छत्रानन्द सिंह झा

और अधिकछत्रानन्द सिंह झा

    अभिशापित शिला बनल

    नागर चरित्र

    हम परखि रहल छी।

    गाछ-पात सब शान्त

    चिड़ै-चनमुनी मौन

    ठमकल लोक, निश्चेष्ट

    करतब भेल बचौन

    गिरगिटिया रंगमे बोरल

    बेबहार अपरिचित

    हम देखि रहल छी।

    भादव जनमल कूदि-फानि

    उपदेश छँटैए

    एते दिन जे मीत बनल छल

    तीत भखैए

    अनभुआर सब घाट-बाट

    सौजन्यहीन—

    घर डेबि रहल छी।

    अभिशापित शिला बनल

    नागर चरित्र

    हम परखि रहल छी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : एक गुलाबक लेल (पृष्ठ 29)
    • रचनाकार : छत्रानन्द सिंह झा
    • प्रकाशन : नीलकण्ठ प्रकाशन, पटना
    • संस्करण : 1988

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