एहि खन चान क्षितिज पर आयल
ehi khan chaan kshitij par aayal
सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
Sudhanshu 'Shekhar' Chaudhary
एहि खन चान क्षितिज पर आयल
ehi khan chaan kshitij par aayal
Sudhanshu 'Shekhar' Chaudhary
सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
और अधिकसुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
एहि खन चान क्षितिज पर आयल!
मनक उदधिमे सुधि लहरायल!
प्रियक पदध्वनि चीन्हल-जानल,
सभ संकेत सहज अनुमानल।
सुनल बोल प्रीतिक जे अनुक्षण
आइ श्रवण-पथसँ टकरायल!
एहि खन चान क्षितिज पर आयल!
डोपटा प्रियक निठाह इजोरिया,
झँपल मनक सन्ताप-अन्हरिया।
दुलित फूल-पातक स्वर-सौरभ,
प्रियक निसासेँ मधु मिझरायल!
एहि खन चान क्षितिज पर आयल!
आँखिक सीढ़ी दऽ क्यो उतरल,
हृदयासन पर सस्मित बैसल।
अंग-अंग उल्सास तरंगित,
मधुक कलश छुबिते ओंघड़ायल!
एहि खन चान क्षितिज पर आयल!
मनक उदधिमे सुधि लहरायल!
- पुस्तक : गजल ओ गीत
- रचनाकार : शेखर प्रकाशन, पटना
- प्रकाशन : सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी
- संस्करण : 1991
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