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ए बबुआ, टोपी बनालऽ चुनाव में

e babua, topi banalऽ chunav mein

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

ए बबुआ, टोपी बनालऽ चुनाव में

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    बबुआ, टोपी बनालऽ चुनाव में

    टोपी बनालऽ

    खोंपी बनालऽ

    गली-गली झंडी उड़ालऽ चुनाव में

    धोती बनालऽ

    कुरता बनालऽ

    खद्दर के झोरा सिआलऽ चुनाव में

    झंडा उठालऽ

    डंडा उठालऽ

    माइक मुंहवा बनालऽ चुनाव में

    गाँधी के सुमिरऽ

    नेहरू के सुमिरऽ

    गीता-कोरनवा उठालऽ चुनाव में

    हरिजन के देखऽ

    गिरिजन के देखऽ

    मुस्लिम के कोरा उठा लऽ चुनाव में

    जतिया बोलावऽ

    पंतिया बोलावऽ

    रतिया खा कनखी चला द, चुनाव में

    भासन के जादू,

    रासन के जादू,

    गोली के जादू देखा दऽ चुनाव में

    अहरा बनादऽ

    पोखरा खनादऽ

    घरे-घरे बिजुली लगा दऽ चुनाव में

    टाटा से मिलिके

    बिड़ला से मिलिके

    रोपेआ के दरिया बहादऽ चुनाव में,

    गोरन से पूछऽ

    करिअन से पूछऽ

    डालर भा रूबल मँगा लऽ चुनाव में,

    'काँगरेस' के बोली

    'जनता' के बोली

    हिटलर के बोली सुना दऽ चुनाव में

    बैलट चोरालऽ

    बकसा चोरालऽ

    बुथवा कबजा जमालऽ चुनाव में,

    पोस्टर निकालऽ

    रोस्टर निकालऽ

    जनता के उल्लू बनालऽ चुनाव में,

    बबुआ टोपी बनालऽ चुनाव में।

    स्रोत :
    • पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 37)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 2009

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