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छिड़ल देसवा में क्रांति के बा तान भइया

chhiDal desva mein kranti ke ba taan bhaiya

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

छिड़ल देसवा में क्रांति के बा तान भइया

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    छिड़ल देसवा में क्रांति के बा तान भइया,

    चलऽ गढ़े मिलिजुलि नया हिन्दुस्तान भइया।

    सैंतालिस के आजादी, रहे नकली आजादी,

    अबहीं रतिये बा, भइल ना बिहान भइया।

    कबो 'कांगरेस' के राज, कबो 'जनता' के साज,

    देखऽ चालू बड़ुए जुलुमी विधान भइया।

    चोर डाकू बटमार, अब चलावत सरकार,

    हक मंगला गोली के निसान भइया।

    देखऽ कइसन राज, जहंवा मंहगा अनाज

    भइल सहता गरीबवन के जान भइया।

    देखऽ नेताजी के हाल, फूलल पूआ नीयन गाल,

    आगे कार चले, पीछे पुलिस भान भइया।

    थाना जेहल अवरू कोट, हउए जुलुमिन के ओट,

    सगरे पइसा बिकऽता ईमान भइया।

    गांवा-गांई बने थाना, सहर भइल जेहल खाना,

    चीकन बतिया के भीतर, सैतान भइया।

    बाघिन अपना दुलरूवा के देहि चाटेले,

    सँउसे देसवा के कइलस मसान भइया।

    कबले देखबऽ तमासा, छोड़ऽ दोसरा के आसा,

    आगे बढ़ऽ झुकि जइहैं भगवान् भइया।

    भगत सिंह आजाद, करत बाड़न फरियाद,

    ताजा बड़ुए सहीदवन के सान भइया।

    बनिजा गंगाजी के धार, तूरऽ राह के पहाड़,

    फहरा लाल किला निसान भइया।

    मिलि-जुलि बोलऽ इन्कलाब, फाड़ऽ मुँहवा के जाव,

    बोलऽ देसवा के ललका सलाम भइया।

    स्रोत :
    • पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 49)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 2009

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