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बीती-बातें भूल चुका हुँ

biti baten bhool chuka hun

विशाल समर्पित

विशाल समर्पित

बीती-बातें भूल चुका हुँ

विशाल समर्पित

और अधिकविशाल समर्पित

    बीती-बातें भूल चुका हुँ

    सच में कुछ भी याद नहीं है

    माना हाल

    हमारा प्रियतम

    इक अनसुलझे हल जैसा है

    लेकिन

    मन में चित्र तुम्हारा

    गहरे-ठहरे जल जैसा है

    मन में भीषण मौन भरा है

    मन में कोई नाद नहीं है

    जाने क्यों

    जाने से पहले

    क्षणभर याद तुम्हारी ठहरी

    जिसके आगे

    दुःख रोते थे

    पता चला वह मूरत बहरी

    हर निर्णय स्वीकार हमें अब

    कोई भी प्रतिवाद नहीं है

    फटे-पुराने

    हर रिश्ते की

    हमने कर डाली तुरपाई

    उर के

    गहरे संत्रासों की

    समय कर गया है भरपाई

    सब के संग हँसता गाता अब

    उर में शेष विषाद नहीं है

    स्रोत :
    • रचनाकार : विशाल समर्पित
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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