Font by Mehr Nastaliq Web

बिसरे ना पीया

bisre na piya

भोलानाथ गहमरी

भोलानाथ गहमरी

बिसरे ना पीया

भोलानाथ गहमरी

और अधिकभोलानाथ गहमरी

    बिसरे ना पीया तोरी हीया से सुरतिया

    पिरितिया भइली जोगिनी हमार।

    पिरितिया भइली…

    सुधिया के दियना जरेला सारी राती,

    बाँचि गइली तनकी एकन जोतिया थाती,

    जिनिगिया दिन-दिन लागे अन्हियार।

    पिरितिया भइली…

    धरती-अकासे जइसे बिहरे पवनवाँ

    बीहरेला विरहा मोरा दूनहुँ नयनवाँ,

    सपनवाँ रहि-रहि डूबे मजधार।

    पिरितिया भइली…

    मन के गगरिया लागलि असरा डोरी,

    मोहिया भईलि पनिहारिन गोरी,

    पियासन काहें छछने पियार।

    पिरितिया भइली…

    स्रोत :
    • पुस्तक : लोक रागिनी (पृष्ठ 42)
    • रचनाकार : भोलानाथ गहमरी
    • प्रकाशन : रागिनी प्रकाशन, गाजीपुर
    • संस्करण : 1995

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY