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भ्रष्टाचार

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रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    एक दिन गइली रपट लिखावै घबड़ायल कुछ माने में।

    का बतलाईं भइया मोर जेब कट गयल थाने में।

    मुन्शी और दीवान भी रहलैं। थाने परधान भी रहलैं।

    दू एक लोग महान भी रहलैं। कुछ मुलजिम मेहमान भी रहलैं।

    आँख मुदाइल भागल अइली गइली चाय दुकाने में।

    का बतलाईं भइया मोर जेब कट गयल थाने में।

    रहि गइली बूड़त उतिरात। कहीं कहले बिगरै बात।

    देखते देखत अस उतपात। ओरी पानी बड़ेरी के जात।

    चाय पियाइलि पान के गइली अगवै चुन्ना पाने में।

    का बतलाईं भइया मोर जेब कट गयल थाने में।

    कहीं बनै तल्ला पर तल्ला। कहीं भूख से रोवै लल्ला।

    छाती फाटी होय दू पल्ला। राम राज होला हल्ला।

    होत रहल भाषण सुनली नेता नये तराने में।

    का बतलाईं भइया मोर जेब कट गयल थाने में।

    नमो नमो हे देवता दानी। राउर सब अकथ कहानी।

    लोग कहैं कविरा बानी। बरसै कम्बल भीजै पानी।

    हम बावला गाँव में रहली खेते में खरिहाने में।

    का बतलाईं भइया मोर जेब कट गयल थाने में॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 195)
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
    • संस्करण : 1997

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