बहल बसंती बेअरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया
bahal basanti beariya ho, piya baanhऽ pagariya
विजेन्द्र अनिल
Vijendra Anil
बहल बसंती बेअरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया
bahal basanti beariya ho, piya baanhऽ pagariya
Vijendra Anil
विजेन्द्र अनिल
और अधिकविजेन्द्र अनिल
बहल बसंती बेअरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया।
घामा में दिन-दिन भर देहिया जरवलऽ
बरखा के पानी में सपना घुलवलऽ
जाड़ा में सेवलऽ बधरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया।
महुआ के फूल नियन मातल जवानी
हो गइल अचके में तीसी के घानी
मिलि-जुलि के काटऽ अन्हरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया।
ओरी त खोंता बा, खोंता में मैना
कँइची से जुलुमी कतर दिहलस डैना
सागर में उठल लहरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया।
बहल बसंती बेअरिया हो, पिया बान्हऽ पगरिया।
- पुस्तक : विजेन्द्र अनिल के गीत (पृष्ठ 20)
- रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
- प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
- संस्करण : 1993
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.