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आजादी पउलस के?

ajadi paulas ke?

रामजियावान दास ‘बावला’

और अधिकरामजियावान दास ‘बावला’

    देश भयल आजाद मगर रण कै बरबादी पउलस के।

    सोचा आजादी पउलस के॥

    के के आपन खून बहावल।

    के आपन सर्वस्व लुटावल।

    केकरे लड़िका बनै कलक्टर ओस्तादी पउलस के।

    सोचा आजादी पउलस के॥

    केकरे बदे किरिन मुसुकाइल।

    धरती केकरे नाम लिखाइल।

    के तरुनी संग मउज उड़ावै, बुढ़िया दादी पउलस के।

    सोचा आजादी पउलस के॥

    केकरे आह से पर्वत टूटल।

    शिव ब्रह्मा आसन छूटल।

    के जोगी बन अलख जगवलस, पर परसादी पउलस के।

    सोचा आजादी पउलस के॥

    शक्ति दीन कै अबही बाय।

    जवने से सुरपति डर खाय।

    लोहे बिटिया के ब्याहल, मगर दमादी पउलस के।

    सोचा आजादी पउलस के॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गीतलोक (पृष्ठ 115)
    • रचनाकार : रामजियावान दास ‘बावला’
    • प्रकाशन : सेवक प्रकाशन, वाराणसी
    • संस्करण : 1997

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